मुंबई के निकट कल्याण के अंबिवली में अडानी सेमेन्ट लिमिटेड के एक प्लांट के लिए केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित एक नियम बदलने की खबरें हैं।
इंडियन एक्स्प्रेस की एक खबर के अनुसार केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने “कैप्टिव पावर प्लांट के बिना सिमेन्ट ग्राइन्डिंग यूनिट” के लिए पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी की शर्त की आवश्यकता समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है।
इस प्लांट का मोहोने समेत आसपास के 11 गाँवों के लोग विरोध कर रहे हैं। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जन सुनवाई बैठक में ग्रामीणों ने घनी आबादी वाले इलाके में प्लांट की अनुमति देने पर सवाल उठाया था और स्वास्थ्य व पर्यावरणीय चिंताओं को लेकर कड़ा विरोध किया था।
केंद्र की 26 सितंबर को जारी एक मसौदा अधिसूचना के अनुसार लोगों से चर्चा और पर्यावरणीय असर आकलन रिपोर्ट की आवश्यकताओं को समाप्त करने के प्रस्ताव देती है। तर्क है कि अकेली ग्राइन्डिंग इकाइयों से कम प्रदूषण होने की संभावना है लेकिन उन पर वैसे ही कड़े नियामक व निगरानी तरीके लागू होते हैं जो एकीकृत सिमेन्ट प्लांट पर लगते हैं।
अधिकारी कहते हैं कि बिना कैप्टिव पावर प्लांट के ग्राइन्डिंग यूनिट कच्चे माल को गरम करने और बाद में सिमेन्ट को छोटे टुकड़ों में तोड़ने जैसे उच्च तापमान वाले प्रोसेस नहीं करतीं। इसका मतलब काम कार्बन निकासी और कम कचरा निकालने और कम ऊर्जा का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा कच्चे माल और बने उत्पादों के रेल्वे और ई वाहनों से ढुलाई से भी प्रदूषण कम होता है।
इस मसौदा अधिसूचना पर 60 दिनों में टिप्पणियाँ और आपत्तियाँ मंगाई गई हैं। प्लांट का विरोध कर रही ग्रामसभा मण्डल मोहोने कोलीवाडा के अध्यक्ष सुभाष पाटील ने कहा कि ग्रामीणों को इस अधिसूचना की जानकारी नहीं है पर ऐसा है तो यह सरकार ठीक नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि अधिसूचना का अध्ययन कर मिलकर फैसला किया जाएगा कि आगे क्या किया जाए।
परियोजना 26.13 हेक्टेयर में फैली है जिसमें से 9.67 हेक्टेयर ग्रीन बेल्ट विकास के लिए और 5.49 हेक्टेयर ग्राइन्डिंग इकाई, गोदाम और पैकिंग प्लांट की स्थापना के लिए हैं। परियोजना 1400 करोड़ की है।
यह जगह पहले नैशनल रेयॉन कंपनी की थी, जो 450 एकड़ में 1945 में बनाई गई थी। यहाँ स्टाफ कालोनी, स्कूल, अस्पताल और अन्य सुविधाएं भी बनाई गईं। 2006 में कंपनी में उत्पादन बंद हो गया और 2009 में तालाबंदी की गई। श्रमिक यूनियनों और कंपनी के बीच बकाया का भुगतान न होने का विवाद हुआ, जो अब तक जारी है। राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में चली लंबी लड़ाई के बाद अडानी समूह ने वर्ष 2020 में संपत्ति हासिल की।